बिटिया को घर के कार्य में दक्ष करें जिससे उसे ससुराल
में कोई भी काम करने में परेशानी, झिझक न हो। यदि आप
अपनी बिटिया को सु-संस्कारों का दहेज देंगे तो आपकी लाडली बिटिया को ससुराल में वो सम्मान व इज्जत मिलेगा जो आपके द्वारा दिए गए कई मूल्यवान उपहार भी दिलाने में समर्थ न हो सकते। इन अनमोल संस्कारों से आपकी लाडली बिटिया उम्र भर खुशियों के भरे सुखमय जीवन व्यतीत कर सकेगी।
माँ की शिक्षा व संस्कार बेटी का घर बनाने व उजाड़ने में बहुत हद तक सहायक होते है।बिटिया को ऐसी शिक्षा व संस्कार दें, जिससे वह अपने नये घर में सहज़ हो सके ससुराल उसका घर है वहाँ के सभी सदस्य बिटिया के अपने परिवार है। यही बात बिटिया को समझाएं क्योंकि आपकी बेटी के घर के मामलों में आपकी अनावश्यक दखलअंदाजी बिटिया की सास तो क्या आपके दामाद भी सह नहीं कर पाएंगे। बिटिया को समझना है कि सास तुमसे अत्यधिक अनुभवशील है। उन्हें दुनिया की समझ तुम से अधिक है। वो घर की बड़ी है अतः उनकी इच्छा व सलाह को मानना सर्वोपरि तुम्हरा धर्म है। किसी व्यक्ति के हृदय को अपने
प्यार, विश्वास, ममता व त्याग से ही जीता जा सकता हैं| ससुराल परिवार को कभी यह एहसास न होने देना कि तुम उनकी बहू हो , बेटी की तरह पूरे मन से उनकी सेवा व आदर करना।”
बिटिया को यह समझा कर विदा करें कि अपने रूप, गुण, सौन्दर्य व प्यार देकर किसी को अपना बनाया जा सकता है न कि उसकी उपेक्षा तथा अनादर करके। सालो से गृहस्थी, घर का बोझ उठाती आई सास की इच्छा होती हैं कि उसको बहू के आ जाने पर कुछ राहत मिले और वह कुछ आराम कर सके। एक सास की सारी अपेक्षाएं व इच्छाएं अपनी बहू से ही जूडी हुई होती है। बहू के आ जाने पर वह अपनी कुछ जिम्मेदारियां अपनी बहू को सौंपना चाहती है जिसे बहू को सहर्ष स्वीकार करना चाहिए। नाते-रिश्तेदार व पड़ोसियों की दखलअंदाजी भी सास-बहू में कलह का एक बड़ा कारण है, इसका ख्याल उसे ही रखना है।
ज़्यदातर औरतें अपनी बहू की निंदा दूसरों के सामने करती देखी जाती हैं। जब पड़ोसी व रिश्तेदार उस बात को खूब
बढाकर बहू के सामने पेश करते हैं तो वह
गुस्से से भर जाती है और बहू के मन में सास के प्रति
स्नेह के स्थान पर गुस्से से घृणा के बीज अंकुरित होने लगते है।
ससुराल में सदैव प्रातःकाल में सबसे से पहले उठे। देर रात तक जागने व सुबह देर तक सोने की आदत को छोड़ दें। ससुराल परिवार के नियम को अपनाएँ, अपने मायके के सिद्धान्तों व नियम को छोड़ दें। मायके से प्राप्त चीजों पर अपना ही अधिकार न जमाए। यदि कोई परिवार का सदस्य इनका इस्तेमाल करता है तो उस पर गुस्सा न
करें । परिवार सदस्य सास, ससुर, ननद, देवर, के साथ मर्यादा में रहकर व प्यार से व्यवहार करे। तभी सदस्यो से अपनों सा प्यार मिलेगा। एक सास का भी बहू के प्रति स्नेह, ममता व अपनेपन का
भाव होगा तभी वह परिवार का अपना समझ पाएगी।