चन्द्रमा… सिर्फ एक ग्रह ही नहीं. अपितु हर धर्म का प्रतीक कहे जाने वाले ईष्ट चन्द्रमा हमारा मन है.

जितना सीखा, और कुछ प्रैक्टिस प्लस अनुभवों से समझ पाया कि…

मन जितना ज्यादा आवश्यक है तन के लिए.
चन्द्रमा उतना ही आवश्यक है ज्योतिष के लिए.

जल जितना आवश्यक है पृथ्वी पे जीवन के लिए.
चन्द्रमा उतना ही आवश्यक है ज्योतिष के लिए.

जल बिना जीवन, मन बिना तन, जल बिना जीवन और चंद्र बिना आकाशमंडल व ज्योतिष अधूरा है.

मेरे विचार से, जिस प्रकाश पृथ्वी पर 75 प्रतिशत भाग जल है जो कि पृथ्वी पर जीवन के लिए अति आवश्यक है उसी प्रकार सम्पूर्ण ज्योतिष मे 75-80 प्रतिशत आवश्यक चन्द्रमा है. चन्द्रमा को समझना, उसकी चाल समझना व उसके स्वभाव को समझना इतना आसान नहीं है. जिस प्रकार हम किसी अन्य के मन की भावना नहीं जान सकते उसी प्रकार चन्द्रमा की गति व युति पकड़ना इतना आसान नहीं.
दोनों ही चीजे पकड़ने के लिए पहले खुद मे चन्द्रमा स्थापित करना आवश्यक है. खुद के मन को संयमित रखना आवश्यक है. जिस प्रकार गुरु के दिए ज्ञान से ध्यान करना आवश्यक है स्वयं के चंद्र को ठीक करने हेतु. तभी आप चंद्र को समझ सकते है.

चन्द्रमा को यूँ ही माँ का प्रतीक नहीं दिया गया है. सम्पूर्ण सृष्टि सिर्फ अपने लिए कार्य करती रहती है. हर ग्रह सूर्य के चक्कर लगाते रहते है, लेकिन जिस प्रकार निस्वार्थ भाव से चन्द्रमा सूर्य का चक्कर ना लगा के हमारी पृथ्वी को ही केंद्र समझ के हमारी पृथ्वी के चारों ओर घूम के हमारा ख्याल रखते है, उसी प्रकार मेरी माँ भी मेरे आगे पीछे घूमती रहती है मेरे चेहरे पर चाँद जैसी मुस्कान लाने के लिए.

चन्द्रमा को यूँ ही नहीं मन का प्रतीक दिया है. जिस प्रकार चन्द्रमा सबसे अधिक गतिशील कहे जाते है ओर सबसे तेज गति से गोचर करते है उसी प्रकार हमारे मन को भी सृष्टि को सबसे तेज चलने का प्रमाण प्राप्त है. जिस प्रकार चन्द्रमा आकाशमंडल मे हमारे चारों ओर भ्रमण करते है, उसी प्रकार उनका हर अलग अलग नक्षत्र व राशि मे गोचर का असर बहुत तेजी से हमारे जीवन पर फलित होता है.

और जिसने गोचर समझ लिया उसने अपनी आने वाली समस्या का आकलन कर लिया. तो जैसे कि आप समझ गए कि जीवन ओर ज्योतिष मे चन्द्रमा सबसे आवश्यक है. तो बस सब छोड़ के ये समझ लीजिये कि चन्द्रमा सबसे अधिक पूज्य्नीय है, और इसी कारण हर धर्म का प्रतीक चन्द्रमा है…

और अपनी आने वाली समस्या का निदान के लिए आवश्यक है चन्द्रमा का उपाय. चन्द्रमा है हमारी माँ. बस उनके चरण धोते जाइये और स्वयं चन्द्रमा के पैर स्वच्छ होते जायँगे. आखिर उन्ही पैरो से तो चन्द्रमा गोचर करते है. बस जहाँ जहाँ माँ और चन्द्रमा के पैर पड़ते जायँगे वहाँ वहाँ खुशहाली आती जाएगी.

माँ और चन्द्रमा पर जितना लिखूँ, उतना ही कम होगा. फिर कभी चन्द्रमा के बारे मे लिखने की और कोशिश करूंगा.
लेकिन अभी के लिए सफल होना है तो माँ के चरण पकड़ लो. जैसे अंधकार मे अकेला चन्द्रमा चमकता है उसी प्रकार तुम्हे सबसे अलग तेजमयी व अंधकार व बुरे समय मे भी अलग चमकने की शक्ति सिर्फ माँ ही दे सकती है.