इस वर्ष चातुर्मास दिनाँक 01 जुलाई से शुरू हो के 25 नवंबर, 2020 तक पाँच माह का चातुर्मास मास होगा |

आखिर क्या होता है चातुर्मास?

वैदिक ज्योतिष एवं वेदों मे वर्णित ज्ञान के अनुसार चातुर्मास चार महीने की वह अवधि है, जो कि हिन्दी माह अनुसार आषाढ़ मास मे शुक्ल पक्ष की एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तक चलता है।

आषाढ़ मास की देवशयनी एकादशी से श्री विष्णु भगवान जी पाताल लोक के राजा बलि के यहाँ चार मास तक निवास करते हैं। ये चार मास श्रावण, भाद्रपद, आश्‍विन और कार्तिक मास होते है। चातुर्मास के पप्रारम्भिक दिन को ‘देवशयनी एकादशी’ कहा जाता है एवं चातुर्मास के आखिरी दिन को ‘देवोत्थान एकादशी’ के नाम से जाना जाता है।

इस वर्ष देवशयनी एकादशी दिनाँक 01 जुलाई को है एवं देवोत्थान एकादशी दिनाँक 25 नवंबर, 2020 को है, इसलिए वर्ष 2020 मे चातुर्मास दिनाँक 01 जुलाई से शुरू हो के 25 नवंबर, 2020 तक पाँच माह का चातुर्मास मास होगा।

आखिर क्या महत्ता है इस चातुर्मास की?

भारत मे अनेक ग्रंथो एवं महाकाव्यों की रचना हुई। धार्मिक ग्रंथो मे वेद एवं पुराणों का बहुत योगदान है। कुल 18 पुराणों मे से एक पुराण ‘ब्रह्मवैवर्त पुराण’ अनुसार योगनिद्रा ने भगवान विष्णु को अपनी तपस्या से प्रसन्न किया था और प्रार्थना की कि आप मुझे अपने अंगों में स्थान दीजिए । योगनिद्रा की तपस्या से प्रसन्न हो कर भगवान श्री विष्णु जी ने अपने नेत्रों में योगनिद्रा को स्थान दे कर कहा कि तुम वर्ष में चार मास मेरे नेत्रो मे रहोगी।

महान हिन्दू धर्म मे अनेक त्योहारों मे अधिकांश त्यौहार चौमासा अर्थात 4माह मे भी आते है। बौद्ध एवं जैन धर्म मे भी इन 4 माह का अत्यधिक विशेष महत्व है |

कैसे करें विष्णु जी की पुजा शृंगार कर शयन विधि?

आने वाले चार माह भगवान श्री विष्णु जी की मूर्ति स्पर्श वर्जित होता है। देवशयनी एकादशी के दिन उपवास रख के भगवान विष्णु की प्रतिमा को पंचामृत से स्नान करवा के पीत(पीले) वस्त्रों से सजाकर श्री हरि की पूजा, अर्चना एवं आरती करनी चाहिए। फल, सुगंध एवं प्रसाद चढ़ाने के बाद निम्नलिखित मन्त्र के द्वारा स्तुति करें।

“सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जगत सुप्तं भवेद इदम।
विबुद्धे त्वयि बुध्येत जगत सर्वं चरा चरम।”
अर्थात, ‘हे जगन्नाथ जी! आपके शयनपर यह सारा जगत सुप्त हो जाता है और आपके जाग जाने पर सम्पूर्ण विश्व तथा चराचर भी जागृत होता हैं।’

क्या करना चाहिए नियम एवं दिनचर्या इन चातुर्मास मे?

इस चातुर्मास मे पाचन शक्ति कमजोर होती है। इसलिए खाना अधिक मात्रा मे नहीं खाना चाहिए, सूर्योदय से पहले उठना, एवं नियमित व्यायाम करना चाहिए एवं स्नान कर के
अधिकतर समय मौन रहने की कोशिश करनी चाहिए।

कौन कौन से कार्य वर्जित होते है चातुर्मास मे?

चातुर्मास के एक 4 माह मे भगवान श्री विष्णु जी के शयन के समय विवाह कार्य, यज्ञोपवीत संस्कार, दीक्षाग्रहण, यज्ञ, गोदान, गृहप्रवेश आदि सभी मंगल कार्य निषेध माने जाते है।

क्या उपाय करें इन चातुर्मास मे?

1. प्रतिदिन दो बार स्नान करना चाहिये। 
2. एक लोटे मे जल ले कर के बेलपत्र डालकर शिवलिंग मे जल चढ़ाये,
3. किसी प्रकार के स्वास्थ्य समस्या मे पिसे हुए तिल या आंवला – मिश्री का घोल अथवा जौं को एक बाल्टी जल मे मिला कर स्नान करें।
4. ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें फिर सिर पर पर पानी डाले। इससे पित्त बीमारी, कंठ की समस्या या सूखना एवं चिड़चिड़ापन कम व स्वभाव संयमित होता है।
5. स्कंदपुराण के अनुसार पलाश के पत्तों पर भोजन करना पाप नाशक और पुण्यदायी होता हैं और ब्रह्मभाव को प्राप्त कराने वाला होता है।

धन्यवाद
लेखक – ज्योतिषी भानु प्रताप पाल
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