एक दीपक होता है जो कि संध्या की अगवानी में घर की नन्हीं बिटिया द्वारा आँगन के तुलसी के पौधे के समक्ष सजाया जाता है। जिसे देखकर ऐसा लगता है जैसे कि मानो वह तुलसी का नन्हा सा प्यारा सा सिर्फ पौधा ही नहीं बल्कि सांझ भी हमसे ही दो घड़ी बातें करने के लिए रुक गयी है। एक दीपक ऐसा होता है जो कि विशेषतः खतरे की सूचना देने वाली ध्वनि की तरह अक्सर घर के बुजुर्गो द्वारा रात के अंधकार के समय जलाया जाता है। जिसे देखकर ऐसा लगता है कि मानो सच मे इस बुढ़ापे ने अपनी जिंदगी के पल से कुछ पल आजाद कर दिए हो।
हाँ ये रात की काली पट्टी पर घिसी और इस दीपक की खुशमिजाज लौ के साथ वह जिंदगी अपनी विजय पर गौरवान्वित हो उठती है।

एक दीपक होता है कि जो नन्हें मुन्नों से सजे घर की आरती में प्रेम पूर्वक मंगल कामनाओं के रूप में प्यारी बहन के द्वारा सजाया जाता है और तो और एक दीपक होता है जो इस जीवन की खुशबु से परिपूर्ण पीली हल्दी से भरे अंग वाली घर की बहू के द्वारा, सुख और समृद्धि की कामना के साथ एक परिवार से ले कर दूसरे परिवार में प्रेमपूर्वक लाया जाता है।
एक दीपक होता है कि जो इसलिए धरा पर आने वाले नये मेहमान के स्वागत में किसीे बच्चे के जन्म होने पर सजता है।
और एक दीपक होता है जो जीवन की मैली स्लेट पर भी उजले अक्षरों के रूप में भरकर मनुष्य को आगे और आगे बढ़ने की राह दिखाता हैं
एक दीपक ऐसा भी होता है, जिसके सहारे प्रेमी अपने पिया की याद में सारी जिंदगी काट देती है और एक दीपक ऐसा भी होता है कि जिसकी लौ को बीच में लेकर वरवधू पहली बार एक दूसरे को निहारते और बिन बोले मन की सारी बात समझ जाते हैं। एक दीपक ऐसा भी होता है कि जो जीवन की समस्त पूजा समाप्त होने के पश्चात् प्रभु के चरणों में सजाया जाता है और फिर वह जलकर नहीं बल्कि अपने आपको जला कर ही जिंदगी की सफल न्यौता आता है।
इन्हीं सब दीपकों को जब एक पंक्ति में संजोया जाता है तो वह दीपावली का पर्व बन जाता है।