प्रत्येक वर्ष भगवान गणेश जी एक निश्चित माह में अपने भक्तों के घर आते हैं, अपने भक्तों से सेवा-सत्कार आदि लेते हैं एवं पुनः अपने घर कैलाश पर्वत की ओर लौट जाते हैं। यह समय गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। गणेश चतुर्थी का पावन त्यौहार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। विशेषतयः इस दिन के बारे में अन्यथा जीवन की किसी भी समस्या अथवा प्रश्न के बारे मे जानना चाहते हैं तो अभी हमसे संपर्क करें 8884682220 पर और अपनी समस्या का हल समझें।

पौराणिक मान्यता है भगवान गणेश जी का जन्म भाद्रपद माह मे शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन मध्याह्न काल में सोमवार के दिन विशेषतयः स्वाति नक्षत्र मे एवं सिंह लग्न के वक़्त हुआ था। इसी वजह से इस चतुर्थी को गणेश चतुर्थी अथवा विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। परंपराओं के आधार पर इस दिन को डण्डा चौथ नामक पर्व भी कहा जाता है।

इस पर्व का असली रंग तो महाराष्ट्र की गलियों में देखने से मिलता है, जहाँ यह पर्व गणेश उत्सव के तौर पर बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। गणेश उत्सव पूरे दस दिनों तक चलने वाला एक प्रकार का भव्य एवं खूबसूरत पर्व है और ये अनंत चतुर्दशी अर्थात कि भगवान गणेश विसर्जन के दिन ही समाप्त होता है। इस शुभ दिन भगवान गणेश जी को हम भव्य रूप से श्रृंगार कर उनकी पूजा अर्चना की जाती है एवं ढोल नगाड़ों व गाजे बाजे के साथ झांकियाँ निकालकर जल में पूर्णतयः विसर्जित किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस सब के बाद भगवान गणेश जी भगवान पुनः अपने घर कैलाश पर्वत की ओर प्रस्थान करते हैं।

वर्ष 2020 मे गणेश चतुर्थी का पर्व 22 अगस्त दिन शनिवार को मनाया जाएगा। भगवान गणेश की पूजा विधि एवं गणेश चतुर्थी मुहूर्त कब है। यह जानने की कोशिश करते ही कि गणेश चतुर्थी मुहूर्त कब है?

पूजा विधि


भगवान गणेश जी के जन्मदिवस पर गणेश चतुर्थी के दिन बहुत से लोग व्रत आदि भी रखते हैं। जो भगवान गणपति की मूर्ति अपने घर मे लेकर आते हैं, उन्हें इस दिन स्नान करने के पश्चात ही सोने, चाँदी, मिट्टी अथवा अन्य किसी भी वस्तु या धातु से बनी भगवान गणेश जी की मूर्ति ही घर लायें।
इसके पश्चात एक कलश में जल भर कर रखें एवं उसे एक सफ़ेद वस्त्र से ढककर उस के ऊपर भगवान गणेश जी की प्रतिमा को यथा स्थान सम्मान पूर्वक स्थापित कर दें।
भगवान गणेश जी की श्रद्धा पूर्वक विधि विधान से पूजा करें एवं उनकी मूर्ति पर सिन्दूर एवं दूर्वा अवश्य चढ़ाएं। भगवान गणेश जी को मोदक एवं लड्डू बहुत ही प्रिय होते हैं। ऐसे में भोग में इन्हें शामिल करना ना भूले।
भगवान गणेश जी की पूजा अर्चना सुबह शाम दोनों वक़्त की करें। शाम की पूजा के समय में गणेश चतुर्थी की कथा एवं गणेश चालीसा और आरती का पाठ अवश्य करें।

भगवान गणेश जी की पूजा में उनके मन्त्रों का उच्चारण करें।

भगवान गणेश चतुर्थी पूजन मुहूर्त
गणेश पूजन के लिए मध्याह्न मुहूर्त
10:20:27 से 12:55:40 तक
कुल अवधि : 2 घंटे 35 मिनट

ध्यान रखने वाली बातें


इस दिन भगवान गणेश जी की पूजा करने से चन्द्र दोष समाप्त होता है। लेकिन आपको भूलकर भी इस दिन चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए। वरना पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आप कलंक के भागी बन जाते हैं। इसलिए आज के दिन को कलंक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है।

Happy Ganesh Chaturthi …!!!