एक समय की बात है प्रयागराज में माघ महीने में बहुत अच्छा गंगा स्नान का शुभ मुहूर्त था। बहुत दूर-दूर से अनेक लोग उस शुभ मुहर्त में गंगा स्नान के लिए आ रहे थे। भगवान शिवजी और माता पार्वती जी भी उस समय वहाँ से जा रहे थे। जब माता पार्वती जी ने यह देखा कि अनेक लोग गंगा स्नान के लिए आ रहे हैं, तो वह बहुत ही खुश हुई। माता ने कहा- प्रभु! इतने लोग आपके भक्त हैं, यह तो अत्यन्त खुशी की बात है। यह सुनकर भगवान शिवजी मुस्कुराने लगे। वह माता पार्वती जी से बोले तुम सोचती हो कि यह सब मेरे भक्त हैं, यह बात सही नहीं है। इतने लाखों लोगो में कोई एक ही मेरा भक्त होगा तथा बाकि सब लोग तो केवल तमाशा देखने आये हुए हैं। गंगा स्नान करने के लिए नहीं। इन लोगों में कम ही लोग होंगे जो सच्चे मन से गंगा स्नान के उद्देश्य से आये होंगे। यह बात को माता पार्वती जी नहीं मानी तो अन्त में भगवान शिवजी ने कहा-तुम चाहो तो इस बात की परीक्षा कर सकती हो कि किसकी बात में सच है, मैं जैसा कहता हु वैसा तुम करो। जब माता पार्वती जी मान गई तो भगवान शिवजी ने एक कोढी आदमी का रूप धारण कर लिया तथा माता पार्वती जी ने एक बहुत ही सुन्दर स्त्री का रूप लिया, गहने पहने व वे दोनों सड़क के किनारे बैठ गए। जहाँ सब लोग आ जा रहे थे। भगवान शिवजी ने माता पार्वती से कहा कि तुम गंगा स्नान करके जो लोग आ रहे हैं, उनसे यह कहो की -“जो सच्चे मन से गंगा स्नान करके आ रहा है वह मेरे पति के ऊपर गंगा जल के छींट मारे तो उससे उसका कोढ दूर हो जाएगा।”
माता पार्वती जी ने भगवान शिव के कथन अनुसार स्नान करके आते लोगों से ऐसा ही कहा-कई लोगों ने तो उनको अनसुना कर दिया, कई लोग तो माता पार्वती से गंदी हंसी मजाक करके चले गए और कई लोग माता से कहते हैं कि-“तुम हमारे साथ चलो अपने पति को यही छोड़कर, हम तुमको खाना, कपड़ा व हर तरह का आराम देंगे। कई तरह के लोग आये, सब कुछ न कुछ कहकर चले जाते परन्तु कोई ऐसा व्यक्ति नहीं आया जिसने गंगा जल की छींटे भगवान शिवजी के कोढी शरीर पर छिड़क दिया हो। माता पार्वती सबसे याचना करती रही तथा ऐसा करते हुए दोपहर हो गई। माता पार्वती जी से भगवान शिवजी ने कहा-देखा मैंने ठीक कहा था। माता पार्वजी जी को निराश मन से भगवान शिवजी की बात को मानना पड़ा। इसके बाद भगवान शिवजी बोले कि यह बात नहीं है कि सब ही लोग पाखण्डी हैं कई तो इसमें ऐसे लोग भी हैं जो मेरे सच्चे भक्त हैं।
भगवान शिव ने माता पार्वजी जी को थोड़ी देर रुकने को कहा। माता पार्वती जी और भगवान शिवजी को खडे-खड़े शाम होने लगी। सूर्य अस्त होने को था कि एक साधु उस ओर आते दिखा। साधु ने एक सुन्दर स्त्री को देखा कर पूछा -“मैया, तुम्हें क्या दुःख है कि तुम इस तरह खड़ी हो।” माता पार्वती जी ने कहा-मेरे पति को कोढ़ हो गया है यदि आप सच्चे मन से गंगा स्नान करके आये हो तो गंगा जल
के छींटे इनके ऊपर दे दीजये तो इनका कोढ दूर हो जायेगा|
इतना सब सुनकर साधु महाराज ने गंगा जल के छींटे भगवान शिवजी के ऊपर छिड़क दिया भगवान शिवजी व माता पार्वती जी ने अपना असली रूप लिया। उन्होंने साधु महाराज को आशीर्वाद दिया तथा अन्तध्यान हो गये।