सूर्य देव एवं चंद्र देव
जैसा कि हम सब जानते है कि सूर्य देव सारे ग्रहों के राजा है. तो वही चंद्र देव को भी सूर्य देव के बाद, ग्रहों मे रानी की उपाधि प्राप्त है.

सूर्य शरीर है तो चंद्र दिल
सूर्य आत्मा है तो चंद्र मन

अगर सूर्य और चन्द्रमा ठीक है तो आपका तन और मन हमेशा अच्छा रहेगा. एक जीवन जीने के लिए सुचारु तन और शक्तिशाली मन होना चाहिए. आप हमेशा प्रसन्न रहेंगे.

इसके सिवा और क्या चाहिए. बाकी इच्छाएं तो जीवन का लोभ है. और लोभ तो आप जानते ही है कि किस ग्रह से सम्बंध रखता है.
अगर आपका तन और मन (सूर्य और चंद्र) ही ठीक नहीं है तो कुछ भी ठीक नहीं है. सूर्य और चंद्र. इन्हे ढूंढने के लिए किसी भी मंदिर मस्जिद मे जाने की जरूरत नहीं है.

आपके घर मे आपके पिताजी जी स्वयं सूर्य है और माताजी स्वयं चन्द्रमा. बस आप इनकी ही पूजा करेंगे, इनकी ही बात माने, इनके ही चरण स्पर्श करें, आपको किसी और के पैर पकड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी जीवन मे.

इस धरतीलोक मे भी सिर्फ दो ही देवता हमें प्रतिदिन साक्षात् दर्शन देते है. एक है सूर्य देव और दूसरे है चंद्र देव. लेकिन हम इंसान इनको इतना जरूरी नहीं समझते है.
आप खुद सोचो क्या कोई और देवता या ग्रह बिना तपस्या जप तप व यज्ञआदि के हमें दर्शन दे सकते है?

लेकिन सूर्य चंद्र हमें प्रतिदिन अपने दर्शन देते है. प्रतिदिन हमें ये अपनी ऊर्जा प्रदान कर के हमें जीवन के नए नए मार्ग दिखाते है.
सूर्य चंद्र की एक एक राशि होने के कारण सूर्य देवता एवं चंद्र देवता एकाकी और एकमत होकर फल देते है. अन्य ग्रहों की तरह दो राशियों के बीच असंतुलन की भावना कभी नहीं होती है.

बस इन दो ग्रहों को ठीक कर ले, आपका जीवन सफल हो जाएगा.

उपाय बस इतना सा है कि अपने माताजी पिताजी के प्रतिदिन चरण स्पर्श करें और उनको खुश रखें. जो माताजी पिताजी से दूर है किसी कारणवश वो लोग उनसे बस एक बार दिन मे फ़ोन मे बात कर के आशीर्वाद ले ले.

जिनके माताजी पिताजी नहीं है वो बस उनकी तस्वीर अपने पास रखें, और सूर्य को पिताजी एवं चंद्र को माताजी मान के उनकी ऊर्जा ज्यादा से ज्यादा ग्रहण करें.