पूजा से संबंधित विषयों पर विवेचन-भगवान सूर्य, भगवान गणेश, माता दुर्गा, भगवान भोले नाथ तथा भगवान विष्णु जी को पंचदेव कहा गया है। ये ही पांचों भगवन सगुण एक परब्रह्म के ही स्वरूप है। हमे समस्त भगवान की पूजा तदनुसार करनी चाहिये।
” इस पृथ्वी पर सुख की इच्छा रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन भगवान शिव, भगवान विष्णु, माता दुर्गा, भगवान गणेश तथा भगवान सूर्य इन भगवान की श्रद्धा व भक्ति से पूजा करनी चाहिये। इनके पूजा से व्यक्ति कभी भी दुख व कष्ट को प्राप्त नहीं करते है।”
” जो व्यक्ति तुलसी से भगवान विष्णु व भगवान शिवजी की पूजा करते हैं। उनको पुनः गर्भ में आने का दुख प्राप्त नहीं होता, वह व्यक्ति निश्चित ही मोक्ष को प्राप्त करते हैं।”
” भगवान शिवजी की पूजा में मालती, कुन्द चमेली, केवड़ा इन फूलों का उपयोग कभी नहीं करना चाहिये।”
” भगवान सूर्यदेव की पूजा में अगस्त्य के फूल निषेध है। अतः इन फूलों से भगवान सूर्यदेव की पूजा न करें।”
“शास्त्रों अनुसार बासी जल और बासी पत्र इन दोनों का ही उपयोग नहीं करना चाहिये। किन्तु यह भी है की शास्त्रों के मतानुसार गंगाजल, तुलसीपत्र, बिल्वपत्र और कमल ये किसी भी अवस्था में बासी नहीं होते हैं।”
” भगवान सूर्य और भगवान गणेश पर बिल्वपत्र अर्पण नहीं करना चाहिये, क्योंकि वे इसे स्वीकार नहीं करते है। किन्तु अन्य सभी भगवान इसे स्वीकार करते हैं।”
“जो भी ब्राह्मण स्नान करने के बाद फूल तोड़ते हैं। उसे देवगण व पितृगण आदि स्वीकार नहीं करते है।”
“वायुपुराण के अनुसार बिना स्नान के जो व्यक्ति तुलसी का चयन कर व पूजनादि करता है। वह निश्चय ही दोष करता है, इस पूजा को भगवान ग्रहण नहीं करते।”
“सुबह जो व्यक्ति स्नान करके पूजा के लिये फूलों का चयन करते हैं और उसके द्वारा भगवान की पूजा करते हैं। इस प्रकार से चढ़ाये गये फूलों को भगवान स्वीकार करते हैं।”
” पूजन में अनामिका अंगुली से गंध लगाने का विधान हमारे शास्त्रों में लिखित है।”
“पूजा में घी का दीपक अपनी बायीं ओर व तेल का दीपक अपनी दाहिनी ओर सदैव रखना चाहिये।”
“भगवान पूजा के लिए जो दीपक प्रज्वलित किया जाता है, उसे अपने आप बुझाना नहीं चाहिये। साथ ही साथ भगवान के सामने दक्षिणाभिमुखी दीपक रखना निषेध है।”
“पूजा के लिए घी का दीपक जलाने के लिये सफ़ेद रूई की बत्ती व कड़वे तेल का दीपक जलाने के लिये लाल रूई की बत्ती का प्रयोग करना चाहिये।”
“पूजा में धूप, दीप तथा सुन्दर से सुन्दर नैवेद्य देवता के सामने रखना चाहिये। नैवेद्य की वस्तुओं के अभाव में यदि व्यक्ति पूजा में फल रखता है तो देवता उसे स्वीकार करते हैं।”
“भगवान गणेश जी की एक, भगवान सूर्यदेव की दो,भगवान विष्णु जी की चार तथा पीपल की सात प्रदक्षिणा करनी चाहिये।”
“माता चण्डी की एक,भगवान सूर्यदेव की सात, भगवान गणेश की तीन,भगवान विष्णु की चार व भगवान शिव की तीन परिक्रमा करनी चाहिये। कुछ शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव की आधी परिक्रमा करने का भी निर्देश है।”
“भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिये पीले रंग का रेशमी वस्त्र चढ़ना चाहिये तथा शक्ति व भगवान सूर्यदेव, भगवान गणेश जी को प्रसन्न करने के लिये रक्तवर्ण का वस्त्र चढ़ना चाहिये। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिये श्वेत वस्त्र चढ़ने का विधान हैं।”