रक्षाबंधन || शुभ मुहूर्त || कब है रक्षाबंधन मुहूर्त ? || कैसे मनाएं रक्षाबंधन ?

रक्षा बन्धन सोमवार, अगस्त 3, 2020 को

रक्षा बन्धन अनुष्ठान का समय – 09:28 से 21:03
अवधि – 11 घण्टे 34 मिनट्स

आपके शहर अनुसार रक्षाबंधन मुहूर्त :
दिल्ली – प्रातः 09:28 से रात्रि 21:15 तक
नोएडा – प्रातः 09:28 से रात्रि 21:14 तक
पुणे – प्रातः 09:28 से रात्रि 21:19 तक
जयपुर – प्रातः 09:28 से रात्रि 21:19 तक
चेन्नई – प्रातः 09:28 से रात्रि 20:49 तक
मुंबई – प्रातः 09:28 से रात्रि 21:24
कलकत्ता – प्रातः 09:28 से रात्रि 20:25 तक
गुरुग्राम – प्रातः 09:28 से रात्रि 21:15 तक
हैदराबाद – प्रातः 09:28 से रात्रि 21:00 तक
बैंगलोर – प्रातः 09:28 से रात्रि 21:00 तक
अहमदाबाद – प्रातः 09:28 से रात्रि 21:28 तक
चंडीगढ़ – प्रातः 09:28 से रात्रि 21:19 तक

रक्षा बन्धन के लिये दोपहर का शुभ मुहूर्त – 13:35 से 16:14
अवधि – 02 घण्टे 40 मिनट्स

रक्षा बन्धन के लिये प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त – 18:54 से 21:03
अवधि – 02 घण्टे 08 मिनट्स

रक्षा बन्धन भद्रा अन्त समय – 09:28
रक्षा बन्धन भद्रा पूँछ – 05:16 से 06:28
रक्षा बन्धन भद्रा मुख – 06:28 से 08:28
भद्रा काल मे रक्षाबंधन अनुष्ठान अथवा राखी बांधना मना है।

पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – अगस्त 02, 2020 को 21:28 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त – अगस्त 03, 2020 को 21:28 बजे

रक्षा बन्धन का पर्व भगवान भोले नाथ के सबसे पावन माह सावन माह की पूर्णमासी तिथि को मनाया जाता है।
दोपहर का समय रक्षा बन्धन अनुष्ठान हेतु सबसे उपयुक्त माना जाता है जो कि भारतीय वैदिक गणना के आधार पर दोपहर के बाद का सुनिश्चित है। अगर कभी दोपहर के समय भद्रा काल हो तो भद्रा काल मे राखी भी बांधनी चाहिए। अगर भद्रा काल लगा हो तो प्रदोष काल का मुहूर्त रक्षा बन्धन के संस्कार के लिये सर्वोत्तम माना जाता है।

भद्रा काल का समय रक्षा बन्धन अनुष्ठान अथवा राखी बाँधने हेतु निषिद्ध माना गया है। हिन्दु वैदिक मान्यताओं के अनुसार सभी शुभ कार्यों एवं मंगल कार्यों हेतु भद्रा का त्याग किया जाना विशेषतयः कहा गया है। सभी हिन्दु वेद पुराण ग्रन्थ और पुराण आदि हमेशा भद्रा समाप्त होने के पश्चात रक्षा बन्धन विधि मनाने अथवा करने को कहा गया हैं।

भद्रा विशेषतः पूर्णिमा तिथि के पूर्वार्ध भाग में उपस्थित रहती है। इस कारण भद्रा काल समाप्त होने के पश्चात ही रक्षा बन्धन किया करना चाहिए।हमारे देश भारत में ज्यादातर परिवारों में प्रातः काल रक्षा बन्धन किया जाता है जो कि कभी कभी भद्रा काल उपस्थित होने के कारण अशुभ समय भी हो सकता है। अतः जब प्रातःकाल भद्रा काल उपस्थित हो तब भद्रा समाप्त होने तक रक्षा बन्धन नहीं करना चाहिये। हम कर्म ज्योतिष आपको रक्षा बन्धन हेतु भद्रा काल को हटा कर ही शुभ मुहूर्त बताते है।