आशा करता हूँ आप सब बहुत अच्छे होंगे.

शनि देव, आपको प्रणाम 🙏

शनि = कर्म

हाँ, आपके कर्म ही शनि है. शनि ही आपके कर्मों का फल देते है.

तो फिर इनसे डरना क्यों?
जी हाँ, डरने की जरूरत है, यदि आप पापी है, यदि आप दुराचारी है, यदि आप दुष्ट है. दरअसल क्या है न्यायलय मे मुजरिम को ही जज़ साहब से डर लगता है.

शनि देव को समझने के लिए चालीसा की दो पंक्तियाँ…

जापर प्रभु प्रसन्न हों जाहीं। रंकहु राउ करें क्षण माहीं।।
पर्वतहूं तृण होई निहारत। तृणहूँ को पर्वत करि डारत।।

अर्थात, यदि कर्म(अर्थात शनि) अच्छे है, तो क्षण भर मे रंक भी राजा बन जाता है.
और यदि कर्म ही बुरे है तो ऊँचा से ऊँचा पहाड़ भी तिनका बन जाता हैं.

शनि को कर्म कहते है, न्याय कहते है, कर्मफलदाता भी कहते है, न्याय के देवता है.

अब आपका शनि(कर्म) खराब हुआ तो, तेल ले के चल दिए उनपे चढाने के लिए. उनकी आरती चालीसा शुरू हों गयी. ढैया या साढ़े साती आयी और बस शनि देव पे तेल तिल चढ़ना शुरू.
तो मतलब ये हुआ की आपका कर्म(अर्थात शनि ) ख़राब हों रहा है. और आप उन न्याय के पालक, न्याय के देवता को ही तेल तिल की घूस देने जा रहे हों ताकि वो आपको दण्ड ना दे.
दो पल के लिए स्वयं सोचे. आप खुद हँस पड़ेंगे की आप न्याय के भगवान को घूस दे रहे हों. 🙏

कुछ चाहिए, तो कर्म कीजिये श्रीमान. कर्म मे ही लग जाये.
वो जज़ साहब अपना काम कर लेंगे. आपको फल मिल जायगा. गीता का सार भी यही कहता है.

आपको परीक्षा मे अच्छे अंक आ जायँगे यदि अापने अध्ययन रूपी कर्म किया है.
आपको कल ही अच्छी नौकरी मिलेगी, यदि अापने मेहनत रूपी कर्म किया है.
आपको व्ववसाय मे भी लाभ होगा, यदि आपने ईमानदार रूपी कर्म किया है.

शनि है सिर्फ कर्मफलदाता, वो अच्छे कर्म का फल अच्छा देंगे, और बुरे कर्म का फल बुरा.

शनि देव से डरना क्यों, यदि वो नही रहे तो आपके शुभ कर्मो का फल कौन देगा.
पर हाँ अगर कर्म ही बुरे है, तो फिर कोई नही बचा सकता. दण्ड तो मिलेगा, दोषी को दण्ड मिलना भी चाहिए.

कुंडली मे शनि कही भी विराजित हों, वो कुंडली मे आपके कर्मो का फल देने हेतु ही उपस्थित रहते है.

शुभ कर्म तो शुभ फल
अशुभ कर्म तो अशुभ फल.

शनिवार है, ना जाने कितने लीटर तेल भी चढ़ेगा, पर आपको क्या लगता है कि तेल चढाने से जो पाप किया था या जो झूठ बोला था उसका दण्ड नहीं मिलेगा अब. ऐसा सोचना ही भूल है. 🙏

शनि को ठीक करना है, तो कर्मो को ठीक करो.
शनि चालीसा से शनि को सम्मान देने की अपेक्षा किसी की करी हुई मेहनत को सम्मान दो. (जैसे की रिक्शा चालक कि मेहनत का पूरा पैसा उसे दे, घर के नौकर को उचित सम्मान और मेहनताना दे, यदि आप मैनेजर है तो अपने से छोटो की मेहनत को सम्मान दे. खुद भी मेहनत करे और कर्म करे.) कर्म करे. कर्म को सम्मान दे. मेहनत को सम्मान दे. अपने बुरे कर्मो को अच्छाई मे परिवर्तित करे. निश्चित है अपके दण्ड मे थोड़ी subsidy (छूट) तो मिल ही जायगी.
यहाँ तक की जेल मे बंद कैदियों की भी सजा अक्सर कम कर दी जाती है उनके कर्म, आचरण एवं विचार मे परिवर्तन देखते हुए.

छोटा सा वाक्य है “जैसी करनी वैसी भरनी”.

अभी भी वक़्त है, जो भी पाप, दुष्कर्म, दुराचार हुए है, उनकी सजा तो मिलेगी ही मिलेगी.
लेकिन आज क्या अभी से ही अपने कर्म, विचार और आचरण मे परिवर्तन ला कर के अच्छे मार्ग मे चले, मैं निश्चय कहता हूँ कि आपके कर्मो के दण्ड मे भी छूट मिलेगी. वरना गंगा नहाने से यदि पाप धुल जाते तो इस देश मे तिहाड़ जेल भेजनें की जगह गंगा मे डुबकी लगवाने का आदेश मिलता न्यायलय से.

आज से ही कर्म मार्ग मे चलना शुरू कर दे. सत्य के मार्ग पर, धर्म के मार्ग पर, अच्छाई के मार्ग पर, निश्चय ही यदि बुरे कर्म है भूतकाल मे किये गए पाप की तो सजा भी कम हों सकती है. और अच्छे कर्म है तों लाभ दोगुना चौगुना या दसगुना भी हों सकता है.

वरना दौड़ते रहिएगा नए नए ज्योतिष के पीछे, और परेशान होते जाइएगा. कर्म करिये, बेड़ा पार हो जायगा. 🙏